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अम्बुआ की डाली पर बैठी कोयल गा रही मल्हार , सुना रही हमे गीत लिए प्यार की पुकार , चहू और है बसंत का मौसम मनमोहक है सारा जहां … दखे इसे मन नाच उठा जैसे, पायल की झंकार … सुगंध फैली है जैसे की कस्तूरी मृग का सुवास,…